Important Questions for HPS Allied Services Mains (GS Paper-1) – XV
- बंगाल में ब्रिटिश साम्राज्य की शुरुआत बक्सर के युद्ध से मानी जाती है। यह युद्ध किस वर्ष लड़ा गया था?
A) 1757
B) 1764
C) 1761
D) 1864
उतर-:B) 1764
व्याख्या :- बक्सर का युद्ध 1763 ई. से ही आरम्भ हो चुका था, किन्तु मुख्य रूप से यह युद्ध 22 अक्तूबर, सन् 1764 ई. में लड़ा गया। ईस्ट इण्डिया कम्पनी तथा बंगाल के नवाब मीर क़ासिम के मध्य कई झड़पें हुईं, जिनमें मीर कासिम पराजित हुआ। फलस्वरूप वह भागकर अवध आ गया और शरण ली। मीर कासिम ने यहाँ के नवाब शुजाउद्दौला और मुग़ल सम्राट शाह आलम द्वितीय के सहयोग से अंग्रेज़ों को बंगाल से बाहर निकालने की योजना बनायी, किन्तु वह इस कार्य में सफल नहीं हो सका। अपने कुछ सहयोगियों की गद्दारी के कारण वह यह युद्ध हार गया।
- बंगाल में लार्ड कार्नवालिस द्वारा किस वर्ष स्थाई बंदोबस्त को लागू किया गया था?
A) 1793
B) 1781
C) 1776
D) 1864
उतर-:A) 1793
व्याख्या:- स्थायी बंदोबस्त अथवा इस्तमरारी बंदोबस्त ईस्ट इण्डिया कंपनी और बंगाल के जमींदारों के बीच कर वसूलने से सम्बंधित एक एक स्थाई व्यवस्था हेतु सहमति समझौता था जिसे बंगाल में लार्ड कार्नवालिस द्वारा 22 मार्च, 1793 को लागू किया गया। स्थाई बन्दोबस्त या ज़मींदारी प्रथा, इस व्यवस्था को जागीरदारी, मालगुज़ारी व बीसवेदारी के नाम से भी जाना जाता था।
1.स्थायी बंदोबस्त की शर्तों के हिसाब से राजाओं और तालुकदारों को ज़मींदारों के रूप में मान्यता दी गई। उन्हें किसानों से लगान वसूलने और कंपनी को राजस्व चुकाने का ज़िम्मा सौंपा गया।
2.इस व्यवस्था में ज़मींदारों की ओर से चुकाई जाने वाली राशि स्थायी रूप से तय कर दी गई थी। इसका मतलब यह था कि भविष्य में कभी भी उसमें इज़ाफा नहीं किया जाएगा। परन्तु यह शर्त केवल ज़मींदारों के लिये थी न कि किसानों के लिये। ज़मींदार किसान से लगान की मांग बढ़ा सकते थे। ऐसा इसलिये था क्योंकि अंग्रेज़ों को लगता था कि राज्य की ओर से राजस्व की मांग बढ़ने वाली नहीं थी इसलिये ज़मींदार बढ़ते उत्पादन से फायदे में रहेंगे और ज़मीन सुधार पर ध्यान देंगे। परन्तु ज़मींदारों ने ऐसा नहीं किया। किसान को जो लगान चुकाना था वह बहुत ज़्यादा था और ज़मीन पर उसका अधिकार भी सुरक्षित नहीं था। ऐसे में किसान कर्ज़ में फँस जाता था तथा उत्पादन घटने से लगान भी नहीं चुका पाता था।
3.जो ज़मींदार राजस्व चुकाने में विफल हो जाता था उसकी ज़मींदारी छीन ली जाती थी।
- 1813 के चार्टर अधिनियम के संबंध में निम्नलिखित तथ्यों पर विचार करें:-
1.कम्पनी का भारतीय व्यापार का एकाधिकार समाप्त कर दिया गया, यद्यपि उसका चीन से व्यापार तथा चाय के व्यापार पर एकाधिकार बना रहा।
2.ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार की अनुमति दी गयी।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनो
D) न तो 1 और न तो 2
उतर-:C) 1 और 2 दोनो
व्याख्या :- कम्पनी के एकाधिकार को समाप्त करने, ईसाई मिशनरियों द्वारा भारत में धार्मिक सुविधाओं की मांग, लॉर्ड वेलेजली की भारत में आक्रामक नीति तथा कम्पनी की सोचनीय आर्थिक स्थिति के कारण 1813 का चार्टर अधिनियम ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किया गया। इसे प्रमुख प्रावधान निम्न थेः
1.कम्पनी का भारतीय व्यापार का एकाधिकार समाप्त कर दिया गया, यद्यपि उसका चीन से व्यापार तथा चाय के व्यापार पर एकाधिकार बना रहा।
2.ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार की अनुमति दी गयी।
3.भारतीयों की शिक्षा के लिए सरकार को प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये खर्च करने का निर्देश दिया गया।
4.कम्पनी को अगले 20 वर्षों के लिए भारतीय प्रदेशों तथा राजस्व पर नियंत्रण का अधिकार दे दिया गया।
5.नियंत्रण बोर्ड की शक्ति को परिभाषित किया गया तथा उसका विस्तार भी कर दिया गया।
- 1883 में पेश किए गए इल्बर्ट बिल का मुख्य उद्देश्य क्या था?
A) अंग्रेज़ अपराधियों के मामलों पर भारत के जजों को सुनवाई का अधिकार देना
B) भारतीय अपराधियों के मामलों पर अंग्रेज जजों को सुनवाई का अधिकार देना
C) वायसराय को अपराधी को दोषमुक्त करने का अधिकार देना।
D) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उतर-:A) अंग्रेज़ अपराधियों के मामलों पर भारत के जजों को सुनवाई का अधिकार देना
व्याख्या :- इल्बर्ट बिल, वायसराय लॉर्ड रिपन के क़ानून सदस्य, ‘सर सी. पी. इल्बर्ट’ ने 1883 ई. में पेश किया था। इसका मुख्य उद्देश्य अंग्रेज़ अपराधियों के मामलों पर भारत के जजों को सुनवाई अधिकार देना था। अंग्रेज़ों ने इस बिल का तीव्र विरोध किया, क्योंकि वे किसी भी भारतीय जज से अपने केस की सुनवाई नहीं चाहते थे। भारतीय जनता ने इस बिल का जोरदार स्वागत किया। अंग्रेज़ों के तीव्र विरोध के आगे अन्तत: सरकार को झुकना पड़ा और उसने इल्बर्ट बिल में संशोधन कर दिया।
- कावेनेंटेड सिविल सर्विस भारत में कम्पनी के प्रशासन तंत्र का एक नियमित हिस्सा किसके शासनकाल में बनी?
A) लॉर्ड डफरिन
B) लॉर्ड कार्नवालिस
C) लॉर्ड रिपन
D) लॉर्ड क्लाइव
उतर-:B) लॉर्ड कार्नवालिस
व्याख्या :- 1757 ई. में प्लासी के युद्ध के बाद जब कम्पनी के आधिपत्य में भारत का काफ़ी बड़ा क्षेत्र आ गया, तो उसने नवविजित क्षेत्रों का प्रशासन अपने इन लिपिकों के सुपुर्द कर दिया। इन नवनियुक्त अफ़सरों ने ज़बरदस्त भ्रष्टाचार और बेईमानी शुरू कर दी। अत: कम्पनी ने उनसे एक क़रार पर हस्ताक्षर करने को कहा, जिसमें कम्पनी की सेवा ईमानदारी और सच्चाई के साथ करने का वचन मांगा गया था। इसी आधार पर अंग्रेज़ी में इस क़रारशुदा सेवा को कावेनेंटेड सिविल सर्विस (क़रार वाली सिविल सेवा) कहा जाने लगा। बंगाल में लॉर्ड क्लाइव के दूसरी बार के प्रशासनकाल में कम्पनी ने पहली बार अपने अफ़सरों को उक्त क़रार करने को बाध्य किया। अफ़सरों ने शुरू में तो इस नई व्यवस्था का विरोध किया किन्तु अंतत: उन्हें झुकना पड़ा। लॉर्ड कार्नवालिस के प्रशासन काल में यह कावेनेंटेड सिविल सर्विस भारत में कम्पनी के प्रशासन तंत्र का एक नियमित अंग बन गई।
- किस वर्ष भारत में अंग्रेजों द्वारा बैंक ऑफ बॉम्बे की स्थापना की गई थी ?
A) 1840
B) 1850
C) 1843
D) 1835
उतर-:A) 1840
व्याख्या :- भारत में अंग्रेजों द्वारा 1840 में बैंक ऑफ बॉम्बे तथा 1843 में बैंक ऑफ मद्रास की स्थापना प्रेसिडेंसी बैंकों के रूप में की गई थी। भारत में बैंकिंग की शुरुआत इन्हीं दोनों बैंकों की स्थापना से मानी जाती है।
- वुड घोषणा पत्र 1854 के संबंध में निम्नलिखित तथ्यों पर विचार करें:-
1.उच्च शिक्षा को अंग्रेज़ी भाषा के माध्यम से दिये जाने पर बल दिया गया, परन्तु साथ ही देशी भाषा के विकास को भी महत्व दिया गया।
2.कलकत्ता, बम्बई एवं मद्रास में एक-एक विश्वविद्यालय की स्थापना की व्यवस्था की गई
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनो
D) न तो 1 और न तो 2
उतर-:C) 1 और 2 दोनो
व्याख्या :- वुड घोषणा पत्र ‘बोर्ड ऑफ़ कन्ट्रोल’ के प्रधान चार्ल्स वुड द्वारा 19 जुलाई, 1854 को जारी किया गया था। इस घोषणा पत्र में भारतीय शिक्षा पर एक व्यापक योजना प्रस्तुत की गई थी, जिसे ‘वुड का डिस्पैच’ कहा गया। 100 अनुच्छेदों वाले इस प्रस्ताव में शिक्षा के उद्देश्य, माध्यम, सुधारों आदि पर विचार किया गया था।
उद्देश्य :
इस घोषण पत्र को भारतीय शिक्षा का ‘मैग्ना कार्टा’ भी कहा जाता है। प्रस्ताव में पाश्चात्य शिक्षा के प्रसार को सरकार ने अपना उदद्देश्य बनाया। उच्च शिक्षा को अंग्रेज़ी भाषा के माध्यम से दिये जाने पर बल दिया गया, परन्तु साथ ही देशी भाषा के विकास को भी महत्व दिया गया। ग्राम स्तर पर देशी भाषा के माध्यम से अध्ययन के लिए लिए प्राथमिक पाठाशालायें स्थापित हुईं और इनके साथ ही ज़िलों में हाईस्कूल स्तर के ‘एंग्लो-वर्नाक्यूलर’ कालेज खोले गये। घोषणा-पत्र में सहायता अनुदान दिये जाने पर बल भी दिया गया था।
विश्वविद्यालय की स्थापना :
प्रस्ताव के अनुसार ‘लन्दन विश्वविद्यालय’ के आदेश पर 1857-58 मे कलकत्ता, बम्बई एवं मद्रास में एक-एक विश्वविद्यालय की स्थापना की व्यवस्था की गई, जिसमें एक कुलपति, उप-कुलपति, सीनेट एवं विधि सदस्यों की व्यवस्था की गई। इन विश्वविद्यालयों को परीक्षा लेने एवं उपाधियाँ प्रदान करने का अधिकार होता था। तकनीकि एवं व्यावसायिक विद्यालयों की स्थापना के क्षेत्र में भी इस घोषणा पत्र में प्रयास किया गया। ‘वुड डिस्पैच’ की सिफ़ारिश के प्रभाव में आने के बाद ‘अधोमुखी निस्यंदन सिद्धान्त’ समाप्त हो गया।
Important Questions for HPS Allied Services Mains (GS Paper-1) – XV
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