Farmer Movement of Mandi 1909 | मण्डी रियासत का किसान आन्दोलन 1909
मंडी रियासत में अनेक आंदोलन हुए। उनमें 1909 का किसान आंदोलन प्रमुख था। यह आंदोलन किसानो ने अपने ऊपर हो रहे शोषण के विरुद्ध शुरू किया था।
आंदोलन का कारण :
1909 ई में मण्डी में राजा भवानी सेन (1903-1912) के समय में एक किसान आन्दोलन हुआ। राजा का वजीर जीवानन्द पाधा एक भ्रष्ट, अत्याचारी और
दुष्ट प्रशासक था। उसने किसानों को डरा-धमका कर सारे अनाज का व्यापार अपने नियत्रंण में कर लिया था। इसके साथ ही किसानों पर अनेक प्रकार के कर लगाकर उनका अत्यधिक आर्थिक शोषण भी करता रहा।
उसने अपने भाई को सेना का मुखिया बनाया और आयोग्य और सिफारिशी कर्मचारियों को नियुक्त किया। उसने बहुत सी धन सम्पत्ति एकत्रित कर ली थी। लोगों पर ‘बेगार’बढ़ा दी थी। रियासत में भ्रष्टचार बहुत बढ़ गया था। उसके अत्याचारों और आर्थिक शोषण से लोग परेशान हो गये थे। ऐसी स्थिति मे सरकाघाट क्षेत्र का शोभाराम 20 व्यक्तियों का एक शिष्ट-मण्डल अपनी शिकायतों को लेकर राजा के पास मण्डी लाया।
राजा ने बजीर की बातों में आकर उनकी शिकायतों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। दूसरी बार शोभाराम फिर 50 व्यक्तियों का शिष्ट-मण्डल लेकर राजा के पास लोगों का रोष प्रकट करने आया।
इस बार भी राजा ने उनकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया। तीसरी बार वह 300 व्यक्तियों को लेकर आया। इस समय कुछ लोगों को आन्दोलन करने के लिये गिरफ्तार कर लिया। उसने सरकार को भी तार भेजे परन्तु उसकी अपील पर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया।
आंदोलन का परिणाम :
अन्त में शोभाराम के नेतृत्व में 20,000 के लगभग किसानों का जुलूस मण्डी पहुंचा। उत्तेजित किसानों ने तहसीलदार हरदेव और अन्य अधिकारियों को पकड़कर जेल में बन्द कर दिया तथा कचहरी और थाने पर कब्जा कर लिया। रियासत का प्रशासन फेल हो गया। सब जगह शोभाराम का हुकुम चलने लगा। इसकी मण्डी में एक कहावत बन गई-
द्रोही भवानी सैने दी। हुकम सोभा रामे दा।।
राजा भवानी सेन ने विवश होकर अंग्रेज सरकार से सहायता मांगी। कांगड़ा जिला के डिप्टीकमीशनर, कुल्लू के सहायक कमीशनर कुछ सैनिकों को लेकर मण्डी पहुंचे। जालन्धर के कमीशनर एच.एस. डैविज भी समय पर मंडी पहुंच गये। राजा ने इन अंग्रेज अधिकारियों की उपस्थिति में आठ दिन तक खुले दरबार में लोगों की शिकायतें सुनीं।
राजा ने लोगों की मांग पर वजीर जीवानन्द को पदच्युत कर दिया। उसके स्थान पर मियां इन्द्र सिंह को वजीर नियुक्त किया गया और कुटलेहड़ के ‘टीका राजेन्द्र पाल को राजा का सलाहकार नियुक्त किया। किसानों के करों में कमी करके अनाज के खुले व्यापार का आदेश दे दिया गया। इसके पश्चात् लोगों ने आन्दोलन समाप्त कर दिया परन्तु मुख्य आन्दोलन- कारियों को पकड़कर बन्दी बना दिया गया। इसके पश्चात् स्थिति सुधर गई।
बल्ह क्षेत्र का आंदोलन :
1909 के सितम्बर मास में मण्डी रियासत में ही एक और जन-आन्दोलन बल्ह क्षेत्र में डोडावन’ के किसानों ने किया। वहां के किसानों ने रियासती सरकार के भूमि वन सम्बधी असंगत कानूनों के विरोध प्रदर्शन किये और सरकारी आदेश मानने से इन्कार कर दिया। इस आन्दोलन के नेता वडसू गांव के सिद्धू खराड़ा थे।
इस बार राजा के सलाहकार टीका राजेन्द्र पाल ने उस क्षेत्र का दौरा किया। कुछ लोगों को पकड़ लिया गया परन्तु बाद में छोड़ दिया गया। जांच करने के पश्चात् दोषियों को पकड़कर सजा दी गई। उनका नेता सिद्धू खराड़ा भागकर हमीरपुर चला गया। परन्तु बाद में मण्डी षड्यंत्र विवाद मे पकड़ा गया और उसे सात वर्ष की सजा हुई।
Farmer Movement of Mandi 1909 | मण्डी रियासत का किसान आन्दोलन 1909
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