Fair And Festival of District Kinnaur | किन्नौर जिले के त्यौहार
हिमाचल प्रदेश के जिला किन्नौर में अनेक प्रकार के मेले तथा त्यौहार मनाए जाते हैं। जिनकी अपनी एक अलग विशेषताएं। मेले और त्यौहार क्षेत्र की संस्कृति ,रीति-रिवाजोंऔर रहन सहन को दर्शाते हैं। किन्नौर जिला के कुछ महत्वपूर्ण मेले तथा त्यौहारों का वर्णन निम्न किया है –
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फुलायच (फुलैच) या उखयांग त्यौहार :
यह त्यौहार किन्नौर का सबसे प्रसिद्ध त्यौहार है। यह मुख्यत: फूलों का त्यौहार है। यह भादों के अंत या आसोज के शुरू के महीने में मनाया जाता है। यह त्यौहार अलग-अलग तिथियों में मनाया जाता है। इसे उखयांग भी कहते हैं। ‘उ’ फूल को कहते हैं और ‘खयांग’ देखने को। उखयांग का अर्थ है फूलों की ओर देखना यानि फूलों का आंनद लेना। यह त्यौहार आमतौर पर गांव के पास पहाड़ियों की चोटियों से रंग-विरंगे फूल चुनकर लाती है। त्यौहार वाले दिन सारे ग्रामवासी ,गाँवो के चौराहे पर इकट्ठे होते हैं। ग्राम -देवता की मूर्ति को मंदिर से वहां ले जाया जाता है। लाए गए फूलों के हार देवता को चढ़ाये जाते हैं। बाद में लोगों में बांट दिए जाते हैं। इस समय देवता का पुजारी आने वाले मौसम और फसलों आदि के बारे भविष्य-वाणियां करता हैं। लोग ज्यादा से ज्यादा फूल घरों को ले जाते हैं।
छतरैल त्यौहार :
छतरैल त्यौहार चैत्र माह (मार्च-अप्रैल) मनाया जाता है। यह त्यौहार मुख्य रूप से चारगाँव में मनाया जाता है।
लोसर त्यौहार :
लोसर त्यौहार नए साल के स्वागत में मनाया जाता है। किन्नौर और लाहौल-स्पीति में लोसर त्यौहार बड़ी धूम -धाम से मनाया जाता है। इस दिन घरों में विशेष प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। सभी रिश्तेदार, दोस्त और परिवार एक दूसरे को नए साल की शुभकामनाएं देते हैं। और चिलगोजा की माला पहनाते हैं।
तोशिम त्यौहार :
तोशिम त्यौहार किनौर का एक प्रसिद्ध त्यौहार है। यह त्यौहार अविवाहित पुरुषों द्वारा मनाया जाता है। इस दिन लोगों द्वारा स्थानीय शराब ‘घांती’ के सेवन का प्रचलन है।
फागुली त्यौहार :
फागली त्यौहार वसंत पंचमी के दिन मनाया जाता है। यह त्यौहार कई दिनों तक मनाया जाता है। यह त्यौहार पर्वतों की देवी काली की पूजा की जाती है। माना जाता है कि त्यौहार मनाने से देवी खुश हो जाती है और लोगो के लिए सुख समृद्धि लाती है।
साजो त्यौहार :
यह त्यौहार जनवरी के महीने मनाया जाता है। इसअवसर पर लोग विशेष प्रकार के पकवान बनाते हैं जैसे पोल्टू, चिल्टा, हलवा, चावल आदि। लोग नजदीक के प्राकृतिक जल स्त्रोतों वावड़ी ,झरनो , नदी में नहाते हैं।
दखरैनी त्यौहार :
दखरैनी त्यौहार जुलाई महीने में मनाया जाता है। इस दिन देवता को मंदिर से बाहर लाया जाता है और लोग देवता को फूल माला चढ़ाई जाती हैं। इस दिन भोज का आयोजन किया जाता है।
जागरो त्यौहार :
यह त्यौहार मोरंग ,कामरु ,रिब्बा में मनाया जाता है। यह त्यौहार शिमला, सिरमौर में भी मनाया जाता है। यह भादो मास से महासू देवता की याद में मनाया जाता है। इसमें रातभर पूजन कार्यक्रम होता है। महासू देवता की प्रशंसा में ‘बिशु’ गीत गाए जाते हैं और लोग व्रत भी रखते हैं।
इसके अलावा किन्नौर में खेपा,छांगो शिशुल और इराटांग आदि प्रसिद्ध त्यौहार मनाए जाते हैं।
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