Bushahr Riyasat ka Dumh Aandolan

Bushahr Riyasat ka Dumh Aandolan (बुशैहर रियासत का दुम्ह आंदोलन)

बुशैहर रियासत का दुम्ह आंदोलन: दूम्ह आन्दोलन में जब कभी राजा कोई ऐसा काम करता या भूमि कर लगाता था, जिसको लोग अनुचित और अन्याय पूर्ण समझते थे तो वे अपना रोष व विरोध प्रदर्शित करने के लिये गांव को छोड़कर पास के जंगल में चले जाते थे। वे अपने परिवार और पशुओं को भी साथ ले जाते थे। फलस्वरूप खेती-बाड़ी का काम ठप्प पड़ जाता था। खेत बंजर पड़ जाते थे।
दूम्ह आन्दोलनकारियों को तो इससे कष्ट होता ही था, पर राज्य को भी इससे भारी क्षति होती थी। जब खेती ही नहीं होती थी तो राज्य की आय भी प्रभावित होती थी। ऐसे आन्दोलन से सत्ता विचलित हो जाती थी और आन्दोलनकारियों की मांग पूरी करने का अविलम्ब प्रयास करती थी।

दूम्ह आन्दोलन प्रायः व्यवस्थित और शातिंपूर्वक होता था । सुलह – समझौता होने पर लोग अपने घरों को वापिस आते और पुन: अपने व्यवसाय खेती-बाड़ी और दूसरे कार्यों को सम्भालते थे ।

बुशहर रियासत में सन् 1859 में दूम्ह आन्दोलन हुआ। इसका प्रमुख केन्द्र रोहडू का क्षेत्र था। इसके कई कारण थे, परन्तु मुख्यत: यह सन् 1854 में सम्पन्न हुई जमीन की पैमाइश के विरुद्ध था। नूरपुर निवासी तहसीदार श्यामलाल ने उक्त समय जमीन का बन्दोबस्त किया और नकदी लगान निश्चित किया। उसके पूर्व भूमि उपज के रूप में पैदावार का निश्चित भाग, अन्न, घी, तेल, ऊन, भेड-बकरी आदि प्राचीन प्रथा के अनुसार राज्य को कर के रूप में देने पड़ते थे।

इस आन्दोलन का सम्बन्ध तत्कालीन राज्य-व्यवस्था से भी था । इन्हीं वर्षों में खानदानी वजीरों की प्रथा समाप्त कर दी गई थी। किन्नौर के पुआरी वरजीरों ने भी इस आन्दोलन को तूल दी। मालगुजारी देने के लिये लोगों के पास मुद्रा का भी अभाव रहता था।

इस दूम्ह आन्दोलन को समाप्त करने के लिये अंग्रेज सरकार का हस्तक्षेप आवश्यक हो गया था।इसको सुलझाने के लिये पहले शिमला के डिप्टी कमीशनर विलियम हेय और फिर रियासतों के सुपरिन्टेण्डेंट जार्ज कारनेक बार्नस बुशहर गये और राजा शर्मशेर सिंह से विचार-विमर्श किया किसानों ने आंदोलन समाप्त करने के लिये तीन मांगे रखी। खानदानी वजीरों को पुराने दस्तूर के अनुसार सत्ता सोपना। उस समय की लगान व्यवस्था समाप्त करना और तीसरी लगान की वसूली परम्परागत ढंग से उपज और वस्तुओं के माध्यम से करना। सुपरिन्टेण्डेंट बार्नस ने आंदोलन की गम्भीरता को देखते हुये तीनों मांगे मान ली । इस प्रकार बुशहर के किसान राजा और अंग्रेज सरकार से अपनी मांगे मनवाने में सफल हुये।

Bushahr Riyasat ka Dumh Aandolan

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