Important Questions for HPS Allied Services Mains (GS Paper-1) – XIV

Important Questions for HPS Allied Services Mains (GS Paper-1) – XIV

  1. भारतीय अर्थव्यवस्था का संक्षिप्त परिचय दें?
    Give a brief account of Indian economy.
    (4 marks, 60 words)

उतर:- 1.भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में तेजी से बढ़ती एक विकासशील अर्थव्यवस्था है। सकल घरेलू उत्पाद के आधार(GDP) पर भारत विश्व की सातवीं तथा क्रय शक्ति क्षमता(PPP) के आधार पर भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
2.वर्ष 2014 से लेकर 2018 तक भारत की औसत वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर 7.5% से अधिक रही है, जो विश्व में किसी भी अर्थव्यवस्था के पिछले 5 वर्षों में रही, औसत आर्थिक वृद्धि से अधिक है।
3.आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के अनुसार भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद में प्राथमिक, द्वितीय और तृतीयक क्षेत्र का योगदान क्रमशः 15.87%, 29.73% और 54.40% है। तथा रोजगार में इनका योगदान क्रमशः 44/%, 25% और 31 % है।
4.भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रवासियों से प्राप्त रेमिटेंस पूंजी विश्व में किसी भी देश द्वारा प्राप्त पूंजी से अधिक है।

  1. भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी विशेषताओं को संक्षेप में बताएं?
    Discribe briefly the basic characteristics of Indian economy?
    (4 marks, 60 words)

उतर:- भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में तेजी से बढ़ती एक विकासशील अर्थव्यवस्था है।इसकी बुनियादी विशेषताओं में शामिल है:-
1.सार्वजनिक एवं निर्जी क्षेत्र का है सह-अस्तित्व एवं समाजवादी अर्थव्यवस्था के साथ पूंजीवाद रुझान।
2.कृषि की प्रधानता, कम औद्योगिक विकास और सेवा क्षेत्र में गौण रोजगार।
3.मानव पूंजी की कमी, अधिक जनसंख्या दबाब, और निम्न प्रति व्यक्ति आय।
4.अवसंरचनात्मक विकास की कमी, कम तकनीकी विकास, गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी की मौजूदगी।
5.जनसांख्यिकी लाभांश की दृष्टि से से भारत विश्व में सबसे अधिक युवा कार्यशील जनसंख्या वाली अर्थव्यवस्था है।
अवसंरचनात्मक विकास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव पूंजी में निवेश से अर्थव्यवस्था में सुधार संभव है।

  1. भारतीय अर्थव्यवस्था एक अल्प विकसित अर्थव्यवस्था है? स्पष्ट करें।
    Indian economy is a less developed economy? Explain
    (8 marks, 120 words)

उतर:- भारत एक अल्पविकसित अर्थव्यवस्था है इसके अंतर्गत निम्न बिंदुओं को शामिल किया जा सकता है:-
• दुनिया का 2.4% भूमि क्षेत्र तथा दुनिया की 18 % प्रतिशत आबादी भारत के पास है जिससे भारत में संसाधनों पर अत्यधिक दबाव होने से अर्थव्यवस्था की स्थिति कमजोर है।
• निम्न प्रति व्यक्ति आय, बड़ी संख्या में श्रम शक्ति का कृषि कार्य में संलग्न होना तथा जीडीपी में औद्योगिक क्षेत्र का कम योगदान इसके अल्पविकसित होने के परिचायक हैं।
• मानव विकास के महत्वपूर्ण आयामों स्वास्थ्य, शिक्षा, गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी में भारत कुछ अल्प विकसित देशों से भी पीछे है और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर हम अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान से भी पीछे हैं।
• हालांकि भारत विश्व की सबसे तेजी से वृद्धि करने वाली अर्थव्यवस्था है लेकिन विश्व की एक तिहाई भूखी आबादी का घर भी भारत ही है। वैश्विक भूख सूचकांक 2019 के अनुसार भारत विश्व में 102वे पायदान पर है।भारत की स्थिति पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश से भी बदतर है। यह सब भी एक अल्पविकसित अर्थव्यवस्था के ही संकेतक हैं।
• अवरचनात्मक विकास का बहुत अभाव है, लोगों का जीवन स्तर बहुत निम्न है। हम संसाधनों का उचित उपयोग नहीं कर पायें हैं। अनुसंधान और विकास में काफी पिछड़े हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारा बजट पड़ोसी देशों श्रीलंका और चीन से भी बहुत कम है, जबकि विश्व में सबसे अधिक तनावग्रस्त और रोग ग्रस्त आबादी का घर भारत है।
उपर्युक्त सभी संकेतको में सुधार से भारत को एक अल्पविकसित अर्थव्यवस्था से विकसित अर्थव्यवस्था स्थापित किया जा सकता है।

  1. उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
    Explain the main characteristic of Indian economy as an emerging economy.
    (8 marks, 120 words)

उतर:- उभरती हुई अर्थव्यवस्था का अर्थ है एक ऐसी अर्थव्यवस्था से है जो अपने विकास की संभावनाओं को तलाशते हुए विकास पथ पर अग्रसर हो।भारत में भी आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ बहुत से क्षेत्रों में अभी सुधार किया जाना बाकी है।
उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएं:-
1.प्रति व्यक्ति आय कम होना-: विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार वर्ष 2019 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय $2000 के करीब है और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर भारत विश्व के 180 देशों में 138 वें स्थान पर है। इस परिदृश्य में भारत सुधार के लिए प्रयासरत है।
2.कृषि क्षेत्र की प्राथमिकता:- आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के अनुसार अभी भी भारत की 44% जनसंख्या कृषि क्षेत्र में कार्यरत है और इसका सकल घरेलू उत्पाद में योगदान 16% के करीब है। अतः कृषि क्षेत्र में छिपी हुई बेरोजगारी की अधिकता है और भारत उद्योग और सेवा क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए प्रयासरत हैं।
3.जनसंख्या दबाव:- विश्व के 2.4% क्षेत्र पर विश्व की 17% जनसंख्या का विद्यमान होना अपने आप में संसाधनों पर दबाव को दिखाता है। जनसंख्या दबाव के कारण भारत में कुपोषण, अशिक्षा, गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी की समस्या विकराल रूप ले रही है। परिणामस्वरूप हम मानव पूंजी के निर्माण में असफल रहे हैं। अभी भी भारत की जनसंख्या का एक बड़ा भाग रोजगार प्राप्त करने के लिए उचित कौशल विकास की समस्या से जूझ रहा है।अतः सरकार द्वारा इस दिशा में कौशल विकास योजना और श्रेयस योजना जैसे प्रयास भी किए गए हैं।
4.प्रौद्योगिकी का निम्न स्तर:- प्रौद्योगिकी का उचित विकास ना होने से अभी भी भारत में आधारभूत विकास की बहुत ज्यादा कमी है।तकनीकी विकास के अभाव में शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को जनसंख्या के एक बड़े भाग तक अभी नहीं पहुंचाया जा सका है।
निम्न प्रति व्यक्ति आय, कृषि क्षेत्र की प्रधानता, अधिक जनसंख्या दबाव व प्रौद्योगिकी का निम्न स्तर उभरती अर्थव्यवस्था की कुछ ऐसी विशेषताएं हैं जिनमें सुधार किए जाने से अर्थव्यवस्था को गति प्रदान की जा सकती है।

  1. भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी विशेषताओं की विस्तार से चर्चा करें।
    Discuss in detail the basic characteristics of Indian economy?
    (20 marks, 400 words)

उतर-: भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में तेजी से बढ़ती एक विकासशील अर्थव्यवस्था है।सकल घरेलू उत्पाद के आधार(GDP) पर भारत विश्व की सातवीं तथा क्रय शक्ति क्षमता(PPP) के आधार पर भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। दुनिया का 2.4% भूमि क्षेत्र तथा दुनिया की 18 % प्रतिशत आबादी भारत में वास करती है जिससे भारत में संसाधनों पर अत्यधिक दबाव होने से अर्थव्यवस्था की स्थिति कमजोर है।
इसके साथ ही अवसरचनात्मक विकास की कमी, गरीबी, बेरोजगारी भुखमरी, स्वास्थ्य और शिक्षा की निम्न गुणवत्ता, कुपोषण की गंभीर समस्या आदि कुछ प्रमुख चुनौतियां भी अर्थव्यवस्था में विद्यमान है। इसके सकारात्मक और नकारात्मक पक्षों को निम्न विशेषताओं के माध्यम से समझा जा सकता है:-

1.विकासशील अर्थव्यवस्था(Developing Economy) -भारत तेजी से बढ़ती एक विकासशील अर्थव्यवस्था है।वर्ष 2014 से लेकर 2018 तक भारत की औसत वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर 7.5% से अधिक रही है, जो विश्व में किसी भी अर्थव्यवस्था के पिछले 5 वर्षों में रही, औसत आर्थिक वृद्धि से अधिक है। इसे उभरती अर्थव्यवस्था भी कहा जाता है क्योंकि बहुत से क्षेत्रों में अभी विकास की अत्यधिक संभावनाएं विद्यमान है तथा बहुत से क्षेत्रों का अभी विकास होना बाकी है।
2.भारत एक मिश्रित अर्थव्यवस्था है ( India’s mixed economy) -भारत की अर्थव्यवस्था को मिश्रित अर्थव्यवस्था कहा जाता है। यहां सार्वजनिक और निजी दोनों ही प्रकार के उद्योग धंधे साथ में काम करते हैं। 1991 में देश में उदारीकरण किया गया है। विदेशी कंपनियों के लिए देश में फ़ैक्टरी, उद्योग, धंधे लगाने का दरवाज़ा खोला गया है।उसके बाद से देश में निजी सेक्टर बहुत तेजी से विकसित हो रहा है। कुछ बुनियादी चीजों जैसे रेलवे, हवाई जहाज़, सैन्य हथियारों का निर्माण, रक्षा क्षेत्र से संबंधित उद्योगों में सरकारी सेक्टर को प्राथमिकता दी गई है।
3.भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान ( Role of Agriculture in Indian Economy) -भारत की 68% आबादी गांव में निवास करती है जो कृषि का काम करती है। भारत की अर्थव्यवस्था पर कृषि का प्रभाव प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से पड़ता है। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 17% कृषि तथा संबंधित क्षेत्र से ही प्राप्त होता है। कृषि को देश की रीढ़ भी कहा जाता है। भारत में कृषि के अंतर्गत फल, अनाज, सब्जियों के साथ पशु-पालन के उद्योग धंधे भी आते हैं।
4.निम्न प्रति व्यक्ति आय -भारत में अधिक जनसंख्या होने से यहां की प्रति व्यक्ति आय बहुत कम है।
5.नई अर्थव्यवस्था (कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच बेहतर असंतुलन) –भारत की अर्थव्यवस्था की बड़ी विशेषता है कि यहां कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच बेहतर संतुलन देखने को मिलता है।
6.भारत की अर्थव्यवस्था में तकनीकी का कम उपयोग –देश की अर्थव्यवस्था में तकनीकी का उपयोग कम मात्रा में हो रहा है। मानव जनित श्रम का इस्तेमाल अधिक हो रहा है जिससे वस्तुओं की लागत बढ़ जाती है। विश्व की दूसरी विकसित अर्थव्यवस्थाओं जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन में तकनीक का इस्तेमाल बढ़-चढ़कर किया जाता है। भारत को यदि विश्व में सर्वोच्च स्थान पाना है तो तकनीकी का उपयोग उद्योग धंधों और कृषि में बढ़ाना होगा।
7.असमान धन वितरण ( Income inequality in India )- भारत की अर्थव्यवस्था में धन वितरण में असमानता देखने को मिलती है। अमीर और गरीब के बीच बड़ी खाई है। देश में मुट्ठी भर लोगों के पास बड़ी मात्रा में धन है, परंतु बाकी जनता गरीबी की समस्या से जूझ रही है। अमीर लोग और अमीर बनते जा रहे हैं। गरीब और गरीब होता जा रहा है। भारत के 2% जनसंख्या के पास देश का 58% धन है।
8.बड़ी जनसंख्या ( India’s population ) – 2018 के अनुसार भारत की आबादी 135 करोड़ से अधिक हो चुकी है। भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहां पर बड़ी मात्रा में आबादी है। जनसंख्या के मामले में भारत चीन के बाद दूसरा बड़ा देश है। बड़ी मात्रा में लोगों को रोज़गार देना एक बड़ी चुनौती है।
9.शहरी क्षेत्रों में तेजी से वृद्धि – भारत की अर्थव्यवस्था की बड़ी विशेषता है कि यहां पर शहरी क्षेत्र तेजी से बढ़ रहे हैं जिसके कारण हर साल नए उद्योग धंधे स्थापित हो रहे हैं। विकास को गति मिल रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार 2050 तक भारत की 60% से अधिक जनसंख्या शहरों में होगी।
10.रोज़गार के अपर्याप्त अवसर ( Unemployment in India ) – भारत की अर्थव्यवस्था में बेरोज़गारी एक बड़ी समस्या है। देश में 135 करोड़ की आबादी है जिसमें 60% आबादी युवा है और काम करने के योग्य है। पर इसके बावजूद देश में बड़ी मात्रा में बेरोज़गारी है। वर्तमान में 6.6% से ऊपर की बेरोजगारी दर है।
11.बुनियादी ढांचे का अभाव ( Challenges of infrastructure in India ) – भारत की अर्थव्यवस्था में बुनियादी ढांचे का अभाव है। पिछले कुछ वर्षों में तेजी से इसमें सुधार किया गया है, पर अभी भी बहुत से क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की कमी है।भारत को यदि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है तो बुनियादी ढांचे में सुधार करना होगा। देश के बहुत से हिस्सों में बिजली, पानी, सड़क, यातायात के संसाधन, जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
12.मूल्य अस्थिरता ( Inflation in India ) – देश में वस्तुओं के मूल्य में अस्थिरता है। आए दिन मूल्य घटता बढ़ता रहता है।
13.तेजी से बढ़ता सेवा क्षेत्र ( Growth of Indian service sector ) – भारत में सेवा क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, मेडिकल, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर निर्माण जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 54.40% का योगदान सेवा क्षेत्र का है।
14.प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं हो पाया है ( Under-utilization of natural resources ) – भारत एक विशाल देश है जहां सभी तरह के प्राकृतिक संसाधन जैसे- ज़मीन, पानी, खनिज, वन, पेट्रोल, पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। पर इन सभी संसाधनों का सही तरह से इस्तेमाल नहीं हो पाया है।
भारत को अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए आधारभूत संरचनाओं जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव पूंजी के निर्माण में निवेश करना होगा। बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी और मानवीय विकास के लिए महत्वपूर्ण अन्य सभी आयामों में सुधार करना होगा। साथ ही भारत को मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत इसे विनिर्माण हब के तौर पर विकसित कर इसे अंतरराष्ट्रीय निर्यात का केंद्र स्थापित करना होगा तभी भारत एक विकासशील अर्थव्यवस्था से एक विकसित अर्थव्यवस्था की ओर शीघ्र अग्रसर होगा।

Important Questions for HPS Allied Services Mains (GS Paper-1) – XIV

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