श्री ज्ञान चंद टूटू – हि.प्र. के स्वतंत्रता सेनानी

Gyan Chand Tutu Shimla HP

श्री ज्ञान चंद टूटू – हि.प्र. के स्वतंत्रता सेनानी

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  • ज्ञान चंद टूटू का जन्म 15 सितम्बर 1919 ई. को टूटू ,शिमला में हुआ।
  • बनारस विश्वविद्यालय में अपने आरम्भिक शैक्षिक वर्षों में पंडित पदम देव के मार्गदर्शन में वे धामी आंदोलन में शामिल हुए।
  • वह धामी प्रजामण्डल के सक्रिय सदस्य बन गए और शिमला रियासती प्रजामण्डल के महासचिव बन गए। 1940 ई. में इसके अध्यक्ष बने।
  • बाद में वह कुनिहार ,अर्की ,कोटी ,ठियोग ,कुमारसैन ,सिरमौर आदि प्रजा मंडलों से सम्बद्ध हो गए।
  • वह हिमालयन क्षेत्रीय परिषद् के प्रतिनिधि थे और फिर इस के उपाध्यक्ष चुने गए। 1946 ई. में उन्होंने हिमालयन क्षेत्रीय परिषद् से त्याग पत्र दे दिया।
  • 1942 ई. में राजकुमारी अमृत कौर ,श्री बैज नाथ और किशोरी लाल के साथ भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हो गए। पटियाला पुलिस द्वारा इन्हे गिरफ्तार किया गया। और दो महीने के लिए कंडाघाट जेल में कठोर कारावास दिया गया।
  • 1946 ई. में कत्ल के झूठे केस में फंसाया गया और तीन महीने के लिए जेल में डाला दिया। 1947 ई. के बाद वे कई संघो और संगठनों के सदस्य रहे।
  • वे पेप्सु विधान सभा के 1953-55 तक सदस्य रहे। 1953-66 तक सार्वजनिक लेखा समिति के चेयरमैन रहे और वे वेतन संशोधन कमेटी (1956 ) के चेयरमैन भी रहे।
  • 1962-66 तक पंजाब विधान सभा के सदस्य रहे। 1956-66 ई. में पंजाब के पहाड़ी क्षेत्रों के विकास और उद्योग के उपमंत्री भी रहे।
  • नये क्षेत्रों का हिमाचल में विलय होने के बाद 1966-67 और 1985-90 ई. में हिमाचल विधान सभा के सदस्य रहे।
  • 1974 ई. में राज्य सभा के लिए चुने गए। 1982 ई. में हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ महासचिव व प्रदेश कांग्रेस (इंदिरा )पार्टी के अध्यक्ष रहे। सन 2009 में इन की मृत्यु हो गई।

श्री ज्ञान चंद टूटू – हि.प्र. के स्वतंत्रता सेनानी

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Bhisham

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