Brief Geography of District Hamirpur – HP

Brief Geography of District Hamirpur – HP

District Hamirpur Source

हमीरपुर
मुख्यालय – हमीरपुर (ऊँचाई समुद्र तल से – 786 मीटर)
कुल क्षेत्रफल – 1118 वर्ग किलोमीटर
भाषाएं- पहाड़ी, हिमाचली या कांगड़ी व हिंदी


हमीरपुर जिला हिमाचल प्रदेश के पश्चिम भाग में स्थित है। हमीरपुर जिला 76°18 से 76°44 पर्वी देशांतर व 30°25 से 31°52 उतरी आक्षांश पर स्थित है। जिला की सारी भूमि पथरीली तथा शिवालिक भू-खंड का भाग है। जिला की अधिकतम ऊँचाई 1100 मोटिर व न्यूनतम 400 मीटर है। समतल क्षेत्र, छोटी-छोटी पहाड़ियां, खड़ी चट्टाने, ढलानदार पहाडियां ही इस जिला के भू-भाग की विशेषताएं हैं। हमीरपुर जिले के उत्तर पूर्व और पूर्व में मंडी ,पश्चिम और दक्षिण पश्चिम में ऊना , उत्तर में काँगड़ा तथा दक्षिण में बिलासपुर जिले की सीमाएं लगती है। हमीरपुर शहर की समुद्रतल से ऊँचाई 786 मीटर है।

हमीरपुर जिला की मुख्य श्रृंखलाएं

जख धार (Jakh Dhar) – यह धार जिला कांगड़ा की काली धार के साथ लगती है। जख धार जिला हमीरपर में नादौन के पास मिलती है तथा दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर बढ़ती जाती है। हमीरपुर शहर इस धार के पूर्व दिशा में अवस्थित है। इस खंड़ का अधिकतर भू-भाग सूखी, खाली व गंजी पहाड़ियों तथा गहरी खाइयों से परिपूर्ण है। चबूतरा पहाड़ियां भी इसी प्रकार की सूखी, घास रहित हैं जैसी कि जखधार की। जख धार ब्यास नदी के साथ-साथ बढ़ती हुई पथरीली उबड़-खाबड़ तथा टूटती पहाड़ियों का दृश्य प्रस्तुत करती है।

चबूतरा पहाड़ी (Chabutra Hills ) : चबूतरा पहाड़ियां हमीरपुर जिले में स्थित है। चबूतरा पहाड़ियाँ भी जख धार की तरह सुखी ,घास रहित है।

सोलहसिंगी धार (Solahsingi Dhar) – जिला हमीरपुर की यह सबसे लम्बी धार है जो अन्य कई नामों से जानी जाती है जैसे ऊना में चिंतपूर्णी व ‘जसवां धार’ तथा हमीरपुर में सोलहसिंगी धार। उतरी दिशा में जिला की सीमा कांगड़ा जिला से लगती है, जिसका निर्धारण ब्यास नदी करती है इसके पश्चिम में ऊना तथा दक्षिण मं बिलासपुर जिला है। पूर्व में इस की सीमा ‘सीर खडडू’ मंडी जिला से तय करती है। हमीरपुर जिला के दक्षिण-पश्चिम में बडसर तहसील, उत्तर में सुजानपुर टीहरा, नदौन उत्तर-पश्चिम में तथा भोरंज पूर्व दिशा में स्थित तहसील है।

जिला में बहने वाली नदियाँ -बेकर खड्ड, पुंग खड्ड, सुंदरा खड्ड, कुनाह खडड, हथला खडड तथा मानखड्डू। इनमें से सभी खड़डे व्यास नदी में मिलती है केवल सुकर व मुंडखर खडड सीर खडड में मिलकर अंतत: सतलुज नदी में समाहित हो जाती है।

शिवालिक श्रृंखला का मध्य व उपरी भूखंड अन्य हिमालयी क्षेत्रों की अपेक्षा नए संकलन क परिणाम है। इस खंड़ की मिट्टी विभिन्न विशेषताओं-पथरीली चिकनी, रेतीली, भुरबरी का समिश्रण है । हिमालय की तलहटी में अवस्थित शिवालिक श्रृंखला की भू-संरचना का आधार यहाँ पर उपलब्ध मिट्टी की किस्म से लगाया जा सकता है। इस खंड की मिट्टी के निर्माण में हिमालयी खंड़ से बहने वाला नदियां हैं जिनके द्वारा लाई गई मिट्टी, पत्थर तथा वनस्पति अवशेषों की विशेष भूमिका है। शिवालिक खंड़ में उपलब्ध उपजाऊ मिट्टी, इन्ही नदियों द्वारा लाई गई है।

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