Important Questions for HP Sub. Allied Services Mains (GS Paper 1) – V

Important Questions for HP Sub. Allied Services Mains (GS Paper 1) – V

प्रश्न संख्या 1 से 4 तक , 4 अंकों के है (शब्द सीमा 60 शब्द )

1.हिमाचल प्रदेश के प्रमुख प्राकृतिक खंडों का संक्षिप्त परिचय दें?
Give a brief introduction of major natural regions of Himachal Pradesh.

उतर:- राज्य का प्राकृतिक विभाजन इसकी समुद्र तल से बढ़ती ऊंचाई के आधार पर किया गया है।
इसके प्राकृतिक खंडों में शामिल है-:
1.शिवालिक अथवा निचले पहाड़ी क्षेत्र-: इस क्षेत्र की समुद्र तल से ऊंचाई 350 मीटर से 1500 मीटर है। इसमे ऊना, कांगड़ा, हमीरपुर, बिलासपुर वह मंडी के मैदानी एवं निम्न पहाड़ी क्षेत्र शामिल है।
2.मध्य हिमालय-: इस क्षेत्र की ऊंचाई 1500 मीटर से 4500 मीटर तक है। हिमाचल के अधिकतर पहाड़ी आबाद क्षेत्र इसी के अंतर्गत आते हैं। इसमें धौलाधार वह पीर पंजाल की पर्वत श्रंखलाएं भी शामिल है।
3.वृहद हिमालय या उच्च पर्वतीय-: इस क्षेत्र की ऊंचाई 4500 मीटर से अधिक है। यह निर्वाद क्षेत्र है।

2.हिमाचल प्रदेश में वनस्पति आवरण व इसके प्रकारों पर एक संक्षिप्त नोट लिखें?
Write a brief note on vegetation cover and types of vegetation in Himachal Pradesh.

उतर:– हिमाचल प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र में से 67% वन क्षेत्र तथा 27% हिस्सा वनस्पति आवरण के अंतर्गत आता है।जिसमें अत्यंत संघन वन व सामान्य संघनन वन 17%, खुले व झाड़ीदार वन 9% पाये जाते हैं।
राज्य में उष्ण, उपोषण, शीतोष्ण व अल्पाइन प्रकार की वनस्पति पाई जाती है। राज्य के निम्न व मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उष्ण व उपोषण कटिबंधीय वन पाए जाते हैं।इनमे चीड़ व नीम इत्यादि के पेड़ की प्रमुखता रहती है।शीतोष्ण व अल्पाइन प्रकार की वनस्पति 3000 से ऊपर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मिलती है। इस क्षेत्र में मुख्य रुप से झाड़ीदार वन पाये जाते हैं।

3.दूंन क्या है? हिमाचल प्रदेश में स्थित प्रमुख दूनो की चर्चा करें।
What are doon? Discuss major doons of Himachal Pradesh.

उतर:- शिवालिक पर्वत श्रृंखला में दो अनुदैर्ध्य पहाड़ीयों के मध्य वसी घाटी को दून कहा जाता है। इन घाटियों में दोनों तरफ से पहाड़ियों का ढलान मध्य की तरफ होता है।
हिमाचल के प्रमुख दूनो में सोलन की दूंन व स्प्रून घाटी, सिरमौर की क्यरादूंन घाटी, बिलासपुर की दाम्बी घाटी, ऊना की जास्वन दूंन घाटी व मंडी की बल घाटी आदि शामिल है।
निम्न ऊंचाई पर स्थित होने के कारण इन घाटियों में कृषि के लिए अनुकूल स्थितियां पाई जाती है। ये घटिया अधिकतर नहरों या नदियों के किनारों के आसपास स्थित है। इस कारण ये बहुत उपजाऊ भी हैं।

4.उप- हिमालयाई क्षेत्रों से आप क्या समझते हैं? हिमाचल में इस क्षेत्र की प्रमुख घाटीयों का वर्णन करें?
What do you understand by sub Himalayan region? Describe the major valleys of this region in HP.

उतर:- बाहरी हिमालय के साथ सटे क्षेत्रों को हिमालय के उप क्षेत्र कहा जाता है इसमें मुख्यत: शिवालिक की पहाड़ियां व इसके उप क्षेत्र शामिल है।
हिमाचल में इस क्षेत्र की प्रमुख घाटियों में शामिल है:-
1.कांगड़ा की पालमपुर, देहरा, नूरपुर, जसवा व आलमपुर की घाटियां एव मंडी की जोगिंदर नगर, पंडोह व बल घटियां।
2.बिलासपुर जिले की डहर व दान्बी घटिया एवं सोलन की दूंन व स्प्रून घाटीयां।
3.हमीरपुर की नादौन व मेबा घाटीयां एवं ऊना की जास्वन दूंन घाटी।
4.कुल्लू की सैन्ज व तीर्थन घाटियां एवं सिरमौर की क्यरादूंन घाटी।

प्रश्न संख्या 5 और 6 , 8 अंकों के है (शब्द सीमा 120 शब्द )

5.सतलुज नदी पर एक संक्षिप्त नोट लिखें। बताएं कि कैसे नदियां हिमाचल के आर्थिक विकास में सहायक है?
Write a brief note on the river Sutlej. Explain how rivers are helpful in the economic development of Himachal?

उतर:- सतलुज हिमाचल में बहने बाली प्रमुख पांच नदियों में से एक है।
इसकी उत्पत्ति तिब्बत में मानसरोवर झील से होती है तथा हिमाचल में यह शिप्की पास से होते हुए किन्नौर जिलें में प्रवेश करती है, तत्पश्चात शिमला व मंडी जिले से होती हुई बिलासपुर में प्रवेश करती है तथा बिलासपुर के बाद पंजाब में प्रवेश करती है एवं पाकिस्तान में जाकर सिंधु नदी में मिल जाती है। ये हिमाचल में बहने वाली सबसे लंबी नदी है तथा तथा इसी पर सबसे अधिक विद्युत उत्पादन प्रोजेक्ट स्थापित किए गए हैं। इसकी कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 10,000 मेगा वाट आंकी गई है।
नदियां हिमाचल के आर्थिक विकास में सहायक है:-
1.इनमें जल विद्युत उत्पादन की अपार क्षमताएं हैं जिससे राज्य के बेरोजगार युवाओं को रोजगार व राज्य को राजस्व प्राप्त होता है।
2.बहुत से लोग अपने जीवन निर्वाह सिंचाई व मछली पालन के लिए सुविधा इन्हीं नदियों से प्राप्त करते हैं।
3.पर्यटन से राज्य को अच्छी आए व रोजगार प्राप्त होता है।और ये नदियां राज्य में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं।
4.किसी भी अर्थव्यवस्था के विकास में वहां के प्राकृतिक संसाधन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं और नदियां राज्य में जैव विविधता को बनाए रखने में सहायक हैं।

6.हिमाचल प्रदेश की जलवायु का संक्षिप्त परिचय देते हुए इसके प्रमुख जलवायु क्षेत्रों का वर्णन करें।
Giving a brief introduction to the climate of Himachal Pradesh, explain its major climate zones.

उतर:- किसी क्षेत्र विशेष के लंबे मौसमी प्रभाव को उस क्षेत्र की जलवायु कहा जाता है।
हिमाचल की भौगोलिक संरचना में विविधता पाए जाने से यहां की जलवायु में भी विविधता पाई जाती है। मैदानी व मध्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अधिक तापमान व सर्दियों में अधिक ठंड रहती है।अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में, जिसमें अधिकतर जनजातीय क्षेत्र शामिल है, वहां अधिकतर मौसम शुष्क व सर्द रहता है। राज्य का सालाना औसत तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहता है जबकि वार्षिक वर्षा 100 सेंटीमीटर से अधिक होती है।
हिमाचल को चार जलवायु क्षेत्रों में बांटा जाता है।इनमें शामिल है:-
1.शिवालिक क्षेत्र-: इसमें छोटी पहाड़ियां व मैदानी क्षेत्र शामिल है इस क्षेत्र की समुद्र तल से ऊंचाई 350 मीटर से 650 मीटर तक रखी गई है।इस क्षेत्र में सामान्य वर्षा व गर्मियों में उच्च तापमान रहता है।
2.मध्य पर्वतीय क्षेत्र:-इस क्षेत्र की समुद्र तल से ऊंचाई 650 मीटर से 1800 मीटर है। इस क्षेत्र में मृदु तापमान व सामान्य वर्षा के कारण नम जलवायु है।
3.उच्च पर्वतीय क्षेत्र:-इस क्षेत्र की समुद्र तल से ऊंचाई 1800 मीटर से 2200 मीटर है। इसमें एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में वर्षा व तापमान में अंतर पाया जाता है। सेब की फसल उगाने के लिए यह सर्वोत्तम क्षेत्र है।
4.शुष्क शीत क्षेत्र:- इस क्षेत्र का मौसम शुष्क रहता है व वर्षा बहुत कम होती है। इसमें लाहौल-स्पीति किन्नौर व पांगी के क्षेत्र आते हैं।

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